अधिगम क्या है? जानिए अधिगम की परिभाषा, महत्व और प्रकार – क्लासिकल कंडीशनिंग, ऑपरेंट कंडीशनिंग, अवलोकन अधिगम, संज्ञानात्मक अधिगम सहित विस्तृत चर्चा हिंदी में। मनोविज्ञान के छात्रों के लिए उपयोगी नोट्स।
अधिगम से आप क्या समझते हैं? अधिगम के प्रकार पर विस्तृत चर्चा करें ।
अधिगम, जिसे अंग्रेजी में लर्निंग कहते हैं, हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर आप सोचें कि हम बचपन से लेकर बड़े होने तक कैसे नई चीजें सीखते हैं, तो यही अधिगम है। सरल शब्दों में, अधिगम से आप क्या समझते हैं? अधिगम वह प्रक्रिया है जिसमें हम अनुभवों, अभ्यास या निर्देशों के माध्यम से अपने व्यवहार, ज्ञान या कौशलों में स्थायी बदलाव लाते हैं। यह सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाले बदलाव भी हैं। उदाहरण के लिए, जब एक बच्चा साइकिल चलाना सीखता है, तो वह गिरकर उठता है और धीरे-धीरे संतुलन बनाना सीख जाता है। यह अधिगम का एक क्लासिक उदाहरण है। मनोविज्ञान में अधिगम को एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है, जो हमें पर्यावरण से अनुकूलित होने में मदद करती है।
अधिगम क्या है, इसकी समझ को गहराई से देखें तो यह सिर्फ याद रखना नहीं है। अधिगम में सीखना, समझना और लागू करना शामिल होता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अधिगम एक ऐसी क्रिया है जो अनुभव से प्राप्त होती है और व्यवहार में परिवर्तन लाती है। जैसे, अगर कोई व्यक्ति आग से जल जाता है, तो अगली बार वह सावधान रहता है – यह अधिगम का परिणाम है। अधिगम के बिना हमारा विकास रुक जाता। शिक्षा, खेल, कामकाज – हर क्षेत्र में अधिगम की भूमिका है। अधिगम क्या है, यह समझने के लिए हमें इसके सिद्धांतों को जानना जरूरी है। थॉर्नडाइक, पावलोव, स्किनर जैसे मनोवैज्ञानिकों ने अधिगम पर गहन अध्ययन किया है। अधिगम एक निरंतर प्रक्रिया है, जो जन्म से मृत्यु तक चलती रहती है।
अधिगम के प्रकार: क्लासिकल कंडीशनिंग
अधिगम के प्रकारों में सबसे पहले क्लासिकल कंडीशनिंग आता है। यह अधिगम का एक बुनियादी प्रकार है, जिसकी खोज रूसी मनोवैज्ञानिक इवान पावलोव ने की थी। क्लासिकल कंडीशनिंग में हम दो उत्तेजकों को जोड़कर सीखते हैं। उदाहरण के लिए, पावलोव के प्रसिद्ध प्रयोग में कुत्ते को भोजन दिखाने से पहले घंटी बजाई जाती थी। शुरू में कुत्ता घंटी से लार नहीं टपकाता था, लेकिन बार-बार ऐसा करने पर कुत्ता सिर्फ घंटी की आवाज से ही लार टपकाने लगता था। यहां भोजन एक प्राकृतिक उत्तेजक (अनकंडीशंड स्टिमुलस) है, और घंटी एक कंडीशंड स्टिमुलस बन जाती है।
क्लासिकल कंडीशनिंग अधिगम का प्रकार है जो भावनाओं और प्रतिक्रियाओं से जुड़ा होता है। रोजमर्रा की जिंदगी में इसका उदाहरण है जब कोई व्यक्ति किसी गंध से डरने लगता है, क्योंकि वह गंध किसी बुरी घटना से जुड़ी होती है। जैसे, अगर कोई एक्सीडेंट में घायल होता है और उस समय पेट्रोल की गंध आ रही होती है, तो बाद में पेट्रोल की गंध से ही वह डर सकता है। इस अधिगम के प्रकार में कोई पुरस्कार या सजा नहीं होती, बल्कि सिर्फ एसोसिएशन (संबंध) बनता है। क्लासिकल कंडीशनिंग के फायदे हैं कि यह फोबिया (डर) का इलाज करने में मदद करता है, जैसे डिसेंसिटाइजेशन थेरेपी में। लेकिन नुकसान यह है कि गलत एसोसिएशन से नकारात्मक आदतें बन सकती हैं। अधिगम के प्रकारों में यह सबसे सरल है, लेकिन प्रभावी।
अधिगम के प्रकार: ऑपरेंट कंडीशनिंग
अधिगम के प्रकारों में अगला है ऑपरेंट कंडीशनिंग, जिसे इंस्ट्रुमेंटल कंडीशनिंग भी कहते हैं। इसकी खोज बी.एफ. स्किनर ने की थी। यहां अधिगम पुरस्कार और सजा के माध्यम से होता है। अगर कोई व्यवहार करने पर सकारात्मक परिणाम मिलता है, तो वह व्यवहार दोहराया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा होमवर्क करता है और माता-पिता से प्रशंसा मिलती है, तो वह फिर से होमवर्क करेगा। स्किनर के बॉक्स प्रयोग में चूहे को लीवर दबाने पर खाना मिलता था, जिससे वह लीवर दबाना सीख जाता था।
ऑपरेंट कंडीशनिंग अधिगम का प्रकार है जो स्वैच्छिक व्यवहार पर फोकस करता है। इसमें चार मुख्य अवधारणाएं हैं: पॉजिटिव रीइनफोर्समेंट (पुरस्कार देना), नेगेटिव रीइनफोर्समेंट (अप्रिय चीज हटाना), पॉजिटिव पनिशमेंट (सजा देना) और नेगेटिव पनिशमेंट (पुरस्कार छीनना)। जैसे, अगर कोई कर्मचारी अच्छा काम करता है और बोनस मिलता है, तो यह पॉजिटिव रीइनफोर्समेंट है। शिक्षा में इसका उपयोग क्लासरूम मैनेजमेंट में होता है, जहां अच्छे व्यवहार पर स्टार दिए जाते हैं। अधिगम के प्रकारों में यह व्यावहारिक है, क्योंकि इससे आदतें बनाई जा सकती हैं। लेकिन आलोचना यह है कि यह सिर्फ बाहरी प्रेरणा पर निर्भर करता है, आंतरिक प्रेरणा नहीं बढ़ाता। ऑपरेंट कंडीशनिंग का उपयोग थेरेपी में भी होता है, जैसे ड्रग एडिक्शन से छुटकारा पाने में।
अधिगम के प्रकार: अवलोकन अधिगम
अधिगम के प्रकारों में अवलोकन अधिगम, जिसे सोशल लर्निंग या मॉडलिंग भी कहते हैं, बहुत महत्वपूर्ण है। अल्बर्ट बैंडुरा ने इसका अध्ययन किया। यहां हम दूसरों को देखकर सीखते हैं, बिना खुद अनुभव किए। बैंडुरा के बोबो डॉल प्रयोग में बच्चों ने वयस्कों को गुड़िया पर हमला करते देखा और खुद भी वैसा ही किया। यह दिखाता है कि बच्चे माता-पिता, टीचर या मीडिया से व्यवहार कॉपी करते हैं।
अवलोकन अधिगम के प्रकार में चार चरण हैं: ध्यान देना, याद रखना, दोहराना और प्रेरणा। जैसे, अगर कोई बच्चा टीवी पर कोई खेल देखता है और उसे कॉपी करता है। अधिगम के प्रकारों में यह सामाजिक है, क्योंकि इससे संस्कृति और मूल्य सीखे जाते हैं। फायदे हैं कि यह तेज और सुरक्षित है – जैसे ड्राइविंग सीखने में सिमुलेटर का उपयोग। लेकिन नुकसान यह है कि गलत मॉडल से हिंसा या बुरी आदतें सीखी जा सकती हैं। मीडिया का प्रभाव इसी पर आधारित है। शिक्षा में टीचर मॉडल बनकर पढ़ाते हैं। अधिगम के प्रकारों में यह आधुनिक जीवन के लिए प्रासंगिक है।
अधिगम के प्रकार: संज्ञानात्मक अधिगम
अधिगम के प्रकारों में संज्ञानात्मक अधिगम दिमाग की आंतरिक प्रक्रियाओं पर आधारित है। जीन पियाजे और वोल्फगैंग कोहलर ने इसका अध्ययन किया। यहां सीखना समस्या समाधान और समझ से होता है, न कि सिर्फ अभ्यास से। कोहलर के चिंपैंजी प्रयोग में बंदर ने बॉक्स रखकर केला लिया – यह इनसाइट (अचानक समझ) का उदाहरण है।
संज्ञानात्मक अधिगम के प्रकार में सोच, स्मृति, धारणा शामिल हैं। पियाजे के अनुसार, बच्चे स्कीमा बनाते हैं और असिमिलेशन-अकॉमोडेशन से सीखते हैं। अधिगम के प्रकारों में यह रचनात्मक है, जैसे मैथ प्रॉब्लम सॉल्व करना। फायदे हैं कि यह गहन समझ देता है। शिक्षा में प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग इसी पर आधारित है। लेकिन यह जटिल है और हर व्यक्ति की बुद्धि पर निर्भर करता है। अधिगम के प्रकारों में यह कंप्यूटर लर्निंग से जुड़ा है।
अधिगम के अन्य प्रकार
अधिगम के प्रकारों में कुछ अन्य भी हैं, जैसे सेंसरी अधिगम (इंद्रियों से), मोटर अधिगम (शारीरिक कौशल), वर्बल अधिगम (भाषा से) और कॉन्सेप्ट अधिगम (अवधारणाएं समझना)। उदाहरण के लिए, मोटर अधिगम में डांस सीखना। ये सभी अधिगम के प्रकार व्यक्तिगत अंतरों पर निर्भर करते हैं। अधिगम क्या है और इसके प्रकारों की चर्चा से पता चलता है कि सीखना बहुआयामी है। विभिन्न प्रकारों का मिश्रण हमें पूर्ण बनाता है।
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