राष्ट्रीय सुरक्षा की वर्तमान स्थिति एवं मुख्य चुनौतियों की विवेचना

राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी देश की अखंडता, संप्रभुता, सीमाओं, नागरिकों और संसाधनों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। भारत जैसे विशाल और विविधताओं वाले लोकतांत्रिक देश के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा एक जटिल और बहुआयामी विषय है। इसमें केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं, बल्कि आंतरिक शांति, साइबर स्पेस, आर्थिक स्थिरता, सामाजिक समरसता और पर्यावरणीय संतुलन जैसी बातें भी शामिल होती हैं। वर्तमान समय में भारत अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खतरों का सामना कर रहा है, जो उसकी सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा की वर्तमान स्थिति

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति को मजबूत लेकिन संवेदनशील कहा जा सकता है। हमारी सेना, नौसेना और वायुसेना तकनीकी और रणनीतिक दृष्टि से काफी सक्षम हैं। सरकार ने हाल के वर्षों में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया है। साथ ही, सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसे अभियानों ने भारत की आक्रामक सुरक्षा नीति का संकेत दिया है। रक्षा बजट में भी लगातार वृद्धि हुई है।

आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से भारत ने कई कदम उठाए हैं – जैसे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना, NIA और UAPA जैसी संस्थाओं को मज़बूत करना, और Naxal प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती। हालाँकि, कई क्षेत्रों में चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।

मुख्य चुनौतियाँ जो राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं:

1. सीमा पार आतंकवाद:
भारत की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौतियों में पाकिस्तान और अफगान सीमा से संचालित होने वाला आतंकवाद है। जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर और अन्य हिस्सों में अस्थिरता फैलाने की कोशिश करते हैं। ड्रोन द्वारा हथियार भेजना और सोशल मीडिया के ज़रिए कट्टरपंथ फैलाना अब आम हो गया है।

2. चीन के साथ सीमा विवाद:
लद्दाख की गलवान घाटी में 2020 की झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ा है। चीन द्वारा बार-बार LAC (Line of Actual Control) पर घुसपैठ की कोशिशें भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। इसके चलते भारत को पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में भारी सैन्य बल तैनात करना पड़ा है।

3. साइबर सुरक्षा की चुनौती:
डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ गया है। सरकारी वेबसाइटों, बैंकिंग सिस्टम, रक्षा प्रतिष्ठानों और निजी डाटा पर लगातार साइबर अटैक किए जा रहे हैं। चीन और अन्य देशों से जुड़े हैकिंग समूह भारत की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हैं। इसके लिए साइबर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना आवश्यक है।

4. आंतरिक विद्रोह और उग्रवाद:
छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र आदि राज्यों में माओवादी और नक्सली गतिविधियाँ अभी भी जारी हैं। वे न केवल आम जनता को नुकसान पहुँचाते हैं बल्कि सुरक्षा बलों पर भी जानलेवा हमले करते हैं। इसी तरह पूर्वोत्तर राज्यों में जातीय हिंसा और अलगाववाद के स्वर समय-समय पर उभरते हैं।

5. धार्मिक और सामाजिक अस्थिरता:
धार्मिक कट्टरता, जातीय भेदभाव, दंगों की घटनाएँ, और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें समाज में विभाजन पैदा करती हैं। इससे न केवल सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होता है बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को भी अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ता है।

6. समुद्री सुरक्षा और समुद्री तस्करी:
हिंद महासागर में भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन पायरेसी, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी, गैर-कानूनी मछली पकड़ना, और पोर्ट सुरक्षा में सेंध जैसे खतरे भारत की समुद्री सुरक्षा को कमजोर कर सकते हैं।

7. प्रवासी आतंकवाद और आतंरिक नेटवर्किंग:
विदेशों में बसे भारतीय मूल के कट्टरपंथी कुछ समय से भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही, देश के अंदर ही कुछ गुट आतंकियों को सहायता देने के लिए सक्रिय रहते हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहचान और निगरानी का कार्य कठिन हो जाता है।

8. जैविक और महामारी संबंधी खतरे:
कोविड-19 ने यह साबित किया है कि जैविक हमले या वैश्विक महामारियाँ भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा हैं। वायरस, बैक्टीरिया और अन्य जैविक हथियारों का उपयोग भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकता है।

इन सभी चुनौतियों के समाधान के लिए एक समन्वित रणनीति की आवश्यकता है जिसमें सैन्य, राजनीतिक, कूटनीतिक, सामाजिक और तकनीकी सभी पहलुओं का संतुलन हो।

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