संचार के अर्थ एवं विशेषता

संचार के अर्थ एवं विशेषताएँ क्या हैं? कॉलेज असाइनमेंट के लिए सरल हिंदी में संचार की परिभाषा, प्रक्रिया, प्रकार और मुख्य विशेषताओं का विस्तृत वर्णन।

संचार के अर्थ एवं विशेषताओं का वर्णन करें।


संचार का अर्थ एवं विशेषताएँ

संचार मानव जीवन की एक अनिवार्य प्रक्रिया है। व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं, अनुभवों और सूचनाओं को दूसरों तक पहुँचाने के लिए जिस प्रक्रिया का उपयोग करता है, वही संचार कहलाती है। सामाजिक, शैक्षणिक, पारिवारिक, व्यावसायिक और प्रशासनिक सभी क्षेत्रों में संचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिना संचार के न तो समाज की कल्पना की जा सकती है और न ही किसी संगठन की। इसीलिए संचार को मानव सभ्यता की आधारशिला माना जाता है।

संचार का अर्थ

संचार शब्द अंग्रेजी के “Communication” से बना है, जिसकी उत्पत्ति लैटिन भाषा के “Communicare” शब्द से मानी जाती है, जिसका अर्थ है साझा करना या बांटना। अर्थात जब कोई व्यक्ति अपने विचार या जानकारी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा करता है, तो वह संचार की प्रक्रिया कहलाती है। संचार केवल बोलने या लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सुनना, समझना, संकेत देना और प्रतिक्रिया देना भी शामिल है।

सरल शब्दों में कहा जाए तो संचार वह माध्यम है जिसके द्वारा एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति तक अपने मन की बात पहुँचाता है और सामने वाला उसे समझता है। यदि संदेश सही ढंग से न पहुँचे या समझा न जाए, तो संचार अधूरा माना जाता है। इसलिए संचार का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि सही अर्थ में समझ बनाना भी है।

शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक और छात्र के बीच संचार के बिना ज्ञान का आदान-प्रदान संभव नहीं है। इसी प्रकार प्रशासन, मीडिया, राजनीति और व्यापार जैसे क्षेत्रों में प्रभावी संचार सफलता की कुंजी है। आज के डिजिटल युग में संचार के माध्यम और भी विस्तृत हो गए हैं, जैसे सोशल मीडिया, ईमेल, वीडियो कॉल आदि, जिनसे संचार और अधिक तेज तथा व्यापक हो गया है।

संचार की विशेषताएँ

संचार की प्रकृति और महत्व को समझने के लिए उसकी विशेषताओं को जानना आवश्यक है। संचार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

1. संचार एक प्रक्रिया है
संचार कोई एक क्षणिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसमें प्रेषक, संदेश, माध्यम, प्राप्तकर्ता और प्रतिक्रिया जैसे तत्व शामिल होते हैं। जब तक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं होती, तब तक संचार पूर्ण नहीं माना जाता। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और समय के साथ बदलती भी रहती है।

2. संचार द्वि-पक्षीय होता है
प्रभावी संचार में दो पक्ष होते हैं – प्रेषक और प्राप्तकर्ता। केवल संदेश भेज देना संचार नहीं कहलाता, जब तक कि प्राप्तकर्ता उसे समझ न ले और अपनी प्रतिक्रिया न दे। इसलिए संचार को एकतरफा नहीं बल्कि द्वि-पक्षीय क्रिया माना जाता है।

3. संचार उद्देश्यपूर्ण होता है
हर संचार के पीछे कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है। यह उद्देश्य सूचना देना, समझाना, प्रेरित करना, निर्देश देना या भावनाओं को व्यक्त करना हो सकता है। बिना उद्देश्य के किया गया संचार अर्थहीन हो जाता है। इसलिए संचार हमेशा किसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया जाता है।

4. संचार सामाजिक प्रक्रिया है
संचार समाज में रहने वाले व्यक्तियों के बीच होता है। यह सामाजिक संबंधों को मजबूत करता है और आपसी समझ को बढ़ाता है। परिवार, मित्र, शिक्षक, विद्यार्थी, अधिकारी और नागरिक सभी संचार के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। समाज की संरचना और व्यवस्था संचार पर ही आधारित होती है।

5. संचार में भावनाओं की भूमिका
संचार केवल तथ्यों और सूचनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भावनाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। व्यक्ति अपने हाव-भाव, स्वर और शब्दों के चयन से अपनी भावनाएँ व्यक्त करता है। कई बार बिना कुछ बोले भी व्यक्ति अपने भाव दूसरों तक पहुँचा देता है, जिसे अशाब्दिक संचार कहा जाता है।

6. संचार के विभिन्न रूप होते हैं
संचार के कई रूप होते हैं, जैसे मौखिक संचार, लिखित संचार और अशाब्दिक संचार। मौखिक संचार में आमने-सामने बातचीत, भाषण और चर्चा शामिल हैं। लिखित संचार में पत्र, रिपोर्ट, नोटिस और ईमेल आते हैं। अशाब्दिक संचार में चेहरे के भाव, आँखों की भाषा, हाथों के संकेत और शरीर की मुद्रा शामिल होती है।

7. संचार सतत और गतिशील है
संचार स्थिर नहीं होता, बल्कि समय, परिस्थिति और संदर्भ के अनुसार बदलता रहता है। व्यक्ति जिस समाज, संस्कृति और वातावरण में रहता है, उसका प्रभाव उसके संचार के तरीके पर पड़ता है। इसलिए संचार को एक गतिशील प्रक्रिया माना जाता है।

8. संचार समझ पर आधारित होता है
संचार की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्राप्तकर्ता संदेश को किस हद तक समझ पाया है। यदि संदेश अस्पष्ट हो या गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया हो, तो गलतफहमी उत्पन्न हो सकती है। प्रभावी संचार के लिए स्पष्टता, सरल भाषा और उपयुक्त माध्यम का चयन आवश्यक है।

9. संचार में माध्यम का महत्व
संदेश को पहुँचाने के लिए जिस साधन का उपयोग किया जाता है, उसे माध्यम कहते हैं। माध्यम का चयन संचार की प्रभावशीलता को प्रभावित करता है। आज के समय में डिजिटल माध्यमों ने संचार को अधिक सुलभ और तेज बना दिया है, लेकिन सही माध्यम का चयन अब भी उतना ही आवश्यक है।

10. संचार व्यवहार को प्रभावित करता है
संचार का प्रभाव सीधे व्यक्ति के विचार और व्यवहार पर पड़ता है। प्रेरक भाषण, प्रभावशाली विज्ञापन और सकारात्मक संवाद व्यक्ति के दृष्टिकोण को बदल सकते हैं। इसी कारण संचार को सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है।

इस प्रकार संचार का अर्थ केवल संदेशों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि आपसी समझ, संबंध निर्माण और सामाजिक समन्वय की एक व्यापक प्रक्रिया है। संचार की विशेषताएँ इसे मानव जीवन का एक अनिवार्य और प्रभावशाली तत्व बनाती हैं, जो हर स्तर पर व्यक्ति और समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं।

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