स्मृति क्या है? स्मृति की परिभाषा और प्रकारों की विस्तृत व्याख्या

स्मृति क्या है? जानिए स्मृति की परिभाषा, प्रक्रिया और प्रकार – संवेदी, अल्पकालिक, दीर्घकालिक (एपिसोडिक, सिमेंटिक, प्रोसीजरल) सहित विस्तृत चर्चा हिंदी में। मनोविज्ञान असाइनमेंट के लिए उपयोगी नोट्स।

स्मृति को परिभाषित करें एवं इनके प्रकारों को विस्तृत व्याख्या करें।

स्मृति हमारे दिमाग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें जीवन के अनुभवों को याद रखने में मदद करती है। अगर आप सोचें कि हम बचपन की यादें कैसे रखते हैं या कोई नई जानकारी कैसे सीखते हैं, तो यही स्मृति का कमाल है। स्मृति क्या है? सरल शब्दों में, स्मृति वह प्रक्रिया है जिसमें हम जानकारी को प्राप्त करते हैं, उसे संग्रहित करते हैं और जरूरत पड़ने पर याद करते हैं। मनोविज्ञान में स्मृति को एक जटिल मानसिक क्रिया माना जाता है, जो हमारे व्यवहार, निर्णय और व्यक्तित्व को प्रभावित करती है। स्मृति के बिना हमारा जीवन असंभव हो जाता, क्योंकि हम कुछ भी सीख नहीं पाते या अनुभवों से सबक नहीं ले पाते।

स्मृति की परिभाषा विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने दी है। उदाहरण के लिए, एटकिन्सन और शिफ्रिन के अनुसार, स्मृति एक बहु-स्तरीय प्रणाली है जिसमें जानकारी को कोडिंग, स्टोरेज और रिट्रीवल के माध्यम से प्रोसेस किया जाता है। कोडिंग में जानकारी को दिमाग में समझने लायक रूप दिया जाता है, स्टोरेज में इसे रखा जाता है, और रिट्रीवल में याद किया जाता है। स्मृति क्या है, इसे समझने के लिए हम कह सकते हैं कि यह दिमाग की क्षमता है जो हमें अतीत को वर्तमान में जीवित रखने देती है। जैसे, अगर आप कोई किताब पढ़ते हैं और बाद में उसके बारे में बताते हैं, तो यह स्मृति का उपयोग है। स्मृति न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि सामाजिक भी, क्योंकि इससे हम संस्कृति और इतिहास को संरक्षित करते हैं।

स्मृति की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों में होती है: एन्कोडिंग, स्टोरेज और रिकॉल। एन्कोडिंग में हम जानकारी को संवेदी इनपुट से बदलते हैं, जैसे देखना या सुनना। स्टोरेज में यह जानकारी दिमाग के विभिन्न भागों में रखी जाती है, जैसे हिप्पोकैंपस जो नई यादें बनाने में मदद करता है। रिकॉल में हम उस जानकारी को निकालते हैं। स्मृति की परिभाषा में यह भी शामिल है कि यह स्थायी नहीं होती; कभी-कभी हम भूल जाते हैं, जिसे फॉरगेटिंग कहते हैं। स्मृति क्या है, यह समझने से हमें पता चलता है कि यह हमारे दैनिक जीवन में कितनी महत्वपूर्ण है, जैसे पढ़ाई, काम या रिश्तों में। अब हम स्मृति के प्रकारों पर विस्तृत चर्चा करेंगे, क्योंकि स्मृति एक नहीं, बल्कि कई प्रकार की होती है।

स्मृति के प्रकार: संवेदी स्मृति

स्मृति के प्रकारों में सबसे पहला है संवेदी स्मृति (Sensory Memory)। यह स्मृति का सबसे शुरुआती स्तर है, जहां जानकारी इंद्रियों से आती है और बहुत कम समय के लिए रहती है। स्मृति के प्रकारों की व्याख्या करते हुए, संवेदी स्मृति को हम कह सकते हैं कि यह एक तरह का बफर है जो दुनिया से आने वाली सूचनाओं को पकड़ता है। उदाहरण के लिए, जब आप कोई फिल्म देखते हैं, तो हर फ्रेम आपकी आंखों में कुछ सेकंड के लिए रहता है – यह आइकॉनिक मेमोरी है, जो दृश्य संवेदी स्मृति का हिस्सा है। इसी तरह, इकोइक मेमोरी ध्वनि से जुड़ी होती है, जैसे कोई आवाज सुनने के बाद उसकी गूंज कुछ सेकंड रहती है।

संवेदी स्मृति की अवधि बहुत कम होती है, लगभग 0.5 से 3 सेकंड तक। इसका उद्देश्य है कि हमारी ध्यान की प्रक्रिया को समय देना, ताकि हम महत्वपूर्ण जानकारी को आगे भेज सकें। अगर हम ध्यान नहीं देते, तो यह जानकारी गायब हो जाती है। स्मृति के प्रकारों में संवेदी स्मृति का महत्व यह है कि यह फिल्टर का काम करती है। जैसे, भीड़ में से कोई नाम सुनना और बाकी शोर को इग्नोर करना। जॉर्ज स्पर्लिंग के प्रयोग से पता चला कि संवेदी स्मृति में बहुत सारी जानकारी स्टोर होती है, लेकिन जल्दी फीकी पड़ जाती है। स्मृति के प्रकारों की विस्तृत व्याख्या में, संवेदी स्मृति हमें बताती है कि हमारा दिमाग कितनी तेजी से काम करता है। इसका उपयोग शिक्षा में होता है, जैसे विजुअल एड्स से सीखना। लेकिन अगर संवेदी स्मृति कमजोर हो, तो ध्यान की समस्या हो सकती है, जैसे एडीएचडी में।

स्मृति के प्रकार: अल्पकालिक स्मृति

स्मृति के प्रकारों में अगला है अल्पकालिक स्मृति (Short-Term Memory) या वर्किंग मेमोरी। यह स्मृति का वह हिस्सा है जहां जानकारी कुछ सेकंड से मिनट तक रहती है। स्मृति क्या है और इसके प्रकारों को समझते हुए, अल्पकालिक स्मृति को हम कह सकते हैं कि यह दिमाग का वर्कबेंच है, जहां हम जानकारी को प्रोसेस करते हैं। जॉर्ज मिलर के अनुसार, अल्पकालिक स्मृति में 7 ± 2 आइटम ही रखे जा सकते हैं, जैसे फोन नंबर याद रखना। लेकिन अगर हम चंकिंग करते हैं, जैसे नंबर को ग्रुप में बांटना, तो ज्यादा याद रख सकते हैं।

अल्पकालिक स्मृति की अवधि लगभग 15-30 सेकंड होती है, अगर हम रिहर्सल (दोहराना) नहीं करते। बैडली और हिच के मॉडल में वर्किंग मेमोरी को चार भागों में बांटा गया: सेंट्रल एक्जीक्यूटिव (नियंत्रक), फोनोलॉजिकल लूप (ध्वनि), विजुओस्पेशल स्केचपैड (दृश्य) और एपिसोडिक बफर (एकीकरण)। स्मृति के प्रकारों की व्याख्या में, अल्पकालिक स्मृति का उपयोग रोजमर्रा में होता है, जैसे शॉपिंग लिस्ट याद रखना या बातचीत में जवाब देना। अगर यह कमजोर हो, तो सीखने में समस्या आती है। रिहर्सल से यह जानकारी दीर्घकालिक स्मृति में जा सकती है। स्मृति के प्रकारों में यह ब्रिज का काम करती है। उदाहरण के लिए, मैथ प्रॉब्लम सॉल्व करते समय नंबर याद रखना अल्पकालिक स्मृति है।

स्मृति के प्रकार: दीर्घकालिक स्मृति

स्मृति के प्रकारों में सबसे महत्वपूर्ण है दीर्घकालिक स्मृति (Long-Term Memory), जहां जानकारी लंबे समय तक रहती है, कभी-कभी जीवन भर। स्मृति की परिभाषा में यह वह स्टोरहाउस है जहां हमारा ज्ञान, अनुभव और कौशल रखे जाते हैं। दीर्घकालिक स्मृति को दो मुख्य प्रकारों में बांटा जाता है: डिक्लेरेटिव (जिसे शब्दों में बता सकते हैं) और प्रोसीजरल (जिसे करके दिखाते हैं)।

डिक्लेरेटिव स्मृति में एपिसोडिक और सिमेंटिक शामिल हैं। एपिसोडिक स्मृति व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़ी होती है, जैसे आपका जन्मदिन पार्टी याद रखना। यह समय और जगह से जुड़ी होती है, और एंडेल टुलविंग ने इसे ‘मेंटल टाइम ट्रैवल’ कहा। सिमेंटिक स्मृति सामान्य ज्ञान से जुड़ी है, जैसे भारत की राजधानी दिल्ली है – यह तथ्य आधारित है। स्मृति के प्रकारों की विस्तृत व्याख्या में, दीर्घकालिक स्मृति की कोई सीमा नहीं होती; हम जितना चाहें उतना स्टोर कर सकते हैं। लेकिन रिकॉल के लिए क्यूज (संकेत) चाहिए, जैसे गंध से पुरानी याद आना।

प्रोसीजरल स्मृति कौशलों से जुड़ी है, जैसे साइकिल चलाना या टाइपिंग। यह बिना सोचे होती है, और सेरिबेलम इसमें भूमिका निभाता है। स्मृति के प्रकारों में दीर्घकालिक स्मृति का महत्व शिक्षा और थेरेपी में है। जैसे, अल्जाइमर में एपिसोडिक स्मृति प्रभावित होती है। कंसॉलिडेशन प्रक्रिया से जानकारी दीर्घकालिक बनती है, जहां नींद महत्वपूर्ण है। स्मृति के प्रकारों को समझने से हमें पता चलता है कि दिमाग कैसे काम करता है।

स्मृति के अन्य प्रकार

स्मृति के प्रकारों में कुछ अन्य भी हैं, जैसे प्रोस्पेक्टिव स्मृति (भविष्य की योजनाएं याद रखना, जैसे मीटिंग अटेंड करना) और रेट्रोस्पेक्टिव स्मृति (अतीत याद रखना)। ऑटोबायोग्राफिकल स्मृति व्यक्तिगत जीवन की कहानी है। स्मृति के प्रकारों की व्याख्या से हमें समझ आता है कि स्मृति बहुआयामी है। विभिन्न प्रकार मिलकर हमें पूर्ण बनाते हैं। जैसे, पढ़ाई में सिमेंटिक और एपिसोडिक दोनों चाहिए। स्मृति सुधारने के लिए मेमोनिक्स, रिहर्सल या एक्सरसाइज मदद करते हैं।

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