साक्षात्कार से क्या आशय है? इसके प्रकारों की विवेचना

साक्षात्कार एक महत्वपूर्ण सामाजिक और शैक्षणिक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग व्यक्ति, संस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है। सामान्य अर्थों में साक्षात्कार दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच होने वाली एक उद्देश्यपूर्ण बातचीत है, जिसमें प्रश्न और उत्तर के माध्यम से किसी विशेष विषय से संबंधित जानकारी, विचार, अनुभव या भावनाएँ प्राप्त की जाती हैं। यह केवल साधारण बातचीत नहीं होती, बल्कि पूर्व निर्धारित लक्ष्य, विषय और रूपरेखा के अनुसार संचालित की जाती है। साक्षात्कार का प्रयोग शिक्षा, पत्रकारिता, अनुसंधान, प्रशासन, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, रोजगार चयन और जनसंचार जैसे अनेक क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है।

साक्षात्कार का मुख्य उद्देश्य सामने वाले व्यक्ति से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करके विश्वसनीय और प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करना होता है। लिखित प्रश्नावली की तुलना में साक्षात्कार अधिक प्रभावी माना जाता है, क्योंकि इसमें प्रश्नकर्ता सामने वाले के हाव-भाव, प्रतिक्रिया, आत्मविश्वास और भावनात्मक स्थिति को भी समझ सकता है। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर प्रश्नों में तुरंत बदलाव या विस्तार किया जा सकता है। इसी कारण साक्षात्कार को एक लचीली और जीवंत प्रक्रिया माना जाता है।

साक्षात्कार के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें उनके उद्देश्य, स्वरूप, प्रक्रिया और उपयोग के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। नीचे साक्षात्कार के प्रमुख प्रकारों की विवेचना की जा रही है।

1. संरचित साक्षात्कार
संरचित साक्षात्कार वह होता है जिसमें प्रश्न पहले से ही तय और क्रमबद्ध होते हैं। साक्षात्कारकर्ता उन्हीं प्रश्नों को उसी क्रम में सभी प्रतिभागियों से पूछता है। इस प्रकार के साक्षात्कार का उपयोग तब किया जाता है जब समान प्रकार की जानकारी विभिन्न लोगों से प्राप्त करनी हो, जैसे नौकरी चयन, सर्वेक्षण या प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित साक्षात्कार। इसमें व्यक्तिगत पक्षपात की संभावना कम होती है और उत्तरों की तुलना करना आसान होता है। हालांकि, इसमें लचीलापन कम होता है और उत्तरदाता अपने विचारों को विस्तार से व्यक्त नहीं कर पाता।

2. असंरचित साक्षात्कार
असंरचित साक्षात्कार में प्रश्न पहले से निश्चित नहीं होते। साक्षात्कारकर्ता विषय के अनुसार बातचीत को आगे बढ़ाता है और परिस्थिति के अनुसार प्रश्न करता है। यह प्रकार अधिक अनौपचारिक होता है और इसमें उत्तरदाता को खुलकर बोलने का अवसर मिलता है। पत्रकारिता, सामाजिक अनुसंधान और मनोवैज्ञानिक अध्ययन में इस प्रकार के साक्षात्कार का अधिक प्रयोग होता है। इसकी विशेषता यह है कि इससे गहन और भावनात्मक जानकारी प्राप्त की जा सकती है, लेकिन यह समय लेने वाला होता है और प्राप्त सूचनाओं को व्यवस्थित करना कठिन हो सकता है।

3. अर्ध-संरचित साक्षात्कार
यह संरचित और असंरचित साक्षात्कार के बीच का रूप है। इसमें कुछ प्रश्न पहले से तय होते हैं, लेकिन साक्षात्कारकर्ता को आवश्यकता अनुसार नए प्रश्न जोड़ने या विषय को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता होती है। यह प्रकार अनुसंधान और शैक्षणिक कार्यों में काफी लोकप्रिय है, क्योंकि इससे आवश्यक जानकारी भी मिलती है और उत्तरदाता के विचारों की गहराई भी सामने आती है।

4. व्यक्तिगत साक्षात्कार
व्यक्तिगत साक्षात्कार में साक्षात्कारकर्ता और उत्तरदाता आमने-सामने होते हैं। यह सबसे पारंपरिक और प्रभावी साक्षात्कार पद्धति मानी जाती है। इसमें प्रत्यक्ष संवाद के कारण विश्वास और सहजता का वातावरण बनता है। नौकरी चयन, प्रवेश परीक्षाओं और परामर्श सेवाओं में इस प्रकार के साक्षात्कार का अधिक प्रयोग किया जाता है। इसकी सीमा यह है कि यह समय और संसाधनों की दृष्टि से महंगा हो सकता है।

5. समूह साक्षात्कार
समूह साक्षात्कार में एक साथ कई उत्तरदाताओं से बातचीत की जाती है। इसमें साक्षात्कारकर्ता समूह के सामने प्रश्न रखता है और सभी प्रतिभागी अपने विचार व्यक्त करते हैं। इसका उपयोग शैक्षणिक संस्थानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सामाजिक अनुसंधान में किया जाता है। इस प्रकार के साक्षात्कार से सामूहिक दृष्टिकोण, आपसी संवाद और सामाजिक व्यवहार को समझने में सहायता मिलती है।

6. टेलीफोन या ऑनलाइन साक्षात्कार
तकनीकी विकास के साथ साक्षात्कार के नए रूप सामने आए हैं। टेलीफोन, वीडियो कॉल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लिए गए साक्षात्कार आज आम हो गए हैं। यह प्रकार समय और दूरी की बाधा को कम करता है। मीडिया, शोध और नौकरी चयन में इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। हालांकि, इसमें प्रत्यक्ष संपर्क न होने के कारण भावनात्मक संकेतों को समझना थोड़ा कठिन हो सकता है।

7. चयनात्मक साक्षात्कार
चयनात्मक साक्षात्कार का उद्देश्य किसी पद, पाठ्यक्रम या अवसर के लिए योग्य उम्मीदवार का चयन करना होता है। इसमें उम्मीदवार की योग्यता, व्यक्तित्व, संप्रेषण क्षमता और आत्मविश्वास का मूल्यांकन किया जाता है। यह प्रायः औपचारिक होता है और इसके लिए स्पष्ट मापदंड निर्धारित किए जाते हैं।

8. अनुसंधान साक्षात्कार
अनुसंधान साक्षात्कार का प्रयोग किसी विषय पर गहन अध्ययन के लिए किया जाता है। इसमें उत्तरदाता के अनुभव, दृष्टिकोण और व्यवहार को समझने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। समाजशास्त्र, मनोविज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में यह अत्यंत उपयोगी माना जाता है।

इस प्रकार साक्षात्कार केवल प्रश्न-उत्तर की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक प्रभावी संप्रेषण माध्यम है, जिसके माध्यम से व्यक्ति और समाज को समझने का प्रयास किया जाता है। अलग-अलग परिस्थितियों और उद्देश्यों के अनुसार इसके विविध रूप विकसित हुए हैं, जो इसे एक बहुआयामी और उपयोगी विधा बनाते हैं।

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