कामायनी का रूपक तत्व

कामायनी का रूपक तत्व

‘कामायनी’ हिन्दी के महाकवि जयशंकर प्रसाद की कालजयी काव्य-रचना है, जिसे हिन्दी साहित्य का श्रेष्ठतम प्रतीकात्मक (symbolic) महाकाव्य माना जाता …

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गोपाल सिंह नेपाली’ के काव्य का मुख्य स्वर राष्ट्रीयता का है। इस कथन की समीक्षा कीजिए।

गोपाल सिंह नेपाली' के काव्य का मुख्य स्वर राष्ट्रीयता का है। इस कथन की समीक्षा कीजिए।

हिन्दी काव्य-जगत में जब भी देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम, और जागरण के स्वर की बात होती है, तब गोपाल सिंह नेपाली का …

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‘उर्वशी’ में व्यक्त कामाध्यात्म पर प्रकाश डालिए।

'उर्वशी' में व्यक्त कामाध्यात्म पर प्रकाश डालिए।

हिन्दी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘उर्वशी’ एक महान काव्य-नाटक है, जिसमें प्रेम, सौंदर्य, …

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‘राम की शक्तिपूजा’ की समीक्षा कीजिए।

'राम की शक्तिपूजा' की समीक्षा कीजिए।

‘राम की शक्तिपूजा’ हिन्दी के प्रसिद्ध कवि माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा नहीं, बल्कि सुभद्राकुमारी चौहान के समकालीन महान कवि महेषी प्रसाद …

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साकेत के नवम् सर्ग के आधार पर उर्मिला के विरह वर्णन की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

साकेत के नवम् सर्ग के आधार पर उर्मिला के विरह वर्णन की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

हिन्दी साहित्य में महाकाव्य ‘साकेत’ को मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित एक अनुपम काव्य कहा जाता है, जिसमें रामकथा को एक …

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संस्कृत नाटकों में कालिदास और शूद्रक के महत्व की विवेचना करें।

संस्कृत नाटकों में कालिदास और शूद्रक के महत्व की विवेचना करें।

प्रस्तावना: संस्कृत साहित्य का नाट्य परंपरा में एक अत्यंत गौरवशाली स्थान है। भारत में नाटक का जन्म वेदों के काल …

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“बिहारी के दोहे ‘गागर में सागर’ की तरह हैं” इस कथन का विश्लेषण करें।

"बिहारी के दोहे 'गागर में सागर' की तरह हैं" इस कथन का विश्लेषण करें।

प्रस्तावना: हिंदी साहित्य में दोहा एक अत्यंत प्रभावशाली और लोकप्रिय काव्य रूप है। इसकी सबसे खास बात है – इसकी …

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निर्गुण भक्ति शाखा की विशेषताएँ बताते हुए कबीर के पदों की विशिष्टता का वर्णन

निर्गुण भक्ति शाखा की विशेषताएँ बताते हुए कबीर के पदों की विशिष्टता का वर्णन

प्रस्तावनाभारतीय भक्ति आंदोलन ने न सिर्फ धर्म को एक नई दिशा दी, बल्कि समाज में व्याप्त जाति-पाति, भेदभाव और आडंबरों …

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