“दलित जीवन की पीड़ाएँ असहनीय और अनुभव-दग्ध हैं। ” इस कथन के आलोक में ओमप्रकाश वाल्मीकि कृत ‘जूठन’ की समीक्षा

परिचयभारत में जाति व्यवस्था ने समाज को कई हिस्सों में विभाजित कर दिया, जिसमें दलित समुदाय सबसे अधिक शोषित और …

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कबीरदास पर टिप्पणी

कबीरदास भारतीय संत, कवि और समाज सुधारक थे, जो 15वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में से एक …

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अष्टछाप पर टिप्पणी

अष्टछाप हिंदी साहित्य के भक्ति काल की एक अद्वितीय परंपरा है, जो विशेष रूप से पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय से जुड़ी …

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राम काव्य पर टिप्पणी

राम काव्य हिंदी साहित्य की प्रमुख विधाओं में से एक है, जो भारतीय संस्कृति, धर्म और साहित्य का अमूल्य हिस्सा …

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उत्तररामचरित पर टिप्पणी

संस्कृत साहित्य के महाकवि भवभूति द्वारा रचित ‘उत्तररामचरित’ संस्कृत नाट्य साहित्य में एक उत्कृष्ट स्थान रखता है। यह नाटक त्रिस्तरीय …

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