प्रेमचंद पूर्व कहानी के उद्भव और विकास की विस्तृत विवेचना। जानें 1900-1915 के बीच की प्रमुख कहानियाँ, ‘उसने कहा था’ का महत्व और किशोरीलाल गोस्वामी से लेकर गुलेरी जी तक के कहानीकारों का योगदान।
प्रेमचंद पूर्व कहानी: विकास और स्वरूप
प्रेमचंद से पूर्व की कहानियों का समय मोटे तौर पर 1900 ई. से 1915 ई. तक माना जाता है। इस कालखंड को अक्सर ‘हिंदी कहानी का उद्भव काल’ कहा जाता है। इस समय की कहानियों पर संस्कृत कथा साहित्य, लोक कथाओं, और अंग्रेजी/बांग्ला कहानियों का गहरा प्रभाव था।
1. युगीन परिस्थितियाँ और कहानी का उद्देश्य
उस समय का समाज संक्रमण के दौर से गुजर रहा था। एक तरफ मध्यकालीन सामंती मूल्य थे, तो दूसरी तरफ आधुनिक शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना का उदय हो रहा था। इस काल की अधिकांश कहानियों का मुख्य उद्देश्य मनोरंजन, कौतूहल और उपदेशात्मकता था।
- तिलस्म और ऐयारी: देवकीनंदन खत्री के प्रभाव के कारण कहानियों में चमत्कार और रहस्य की प्रधानता थी।
- सुधारवादी दृष्टिकोण: आर्य समाज और अन्य सुधार आंदोलनों के कारण लेखकों का ध्यान सामाजिक कुरीतियों की ओर भी गया, लेकिन उनका चित्रण गहरा नहीं था।
2. प्रथम कहानी का विवाद और प्रमुख कहानियाँ
हिंदी की ‘पहली कहानी’ को लेकर विद्वानों में मतभेद है, लेकिन इस काल की कुछ रचनाओं ने कहानी के शिल्प को गढ़ने में बड़ी भूमिका निभाई:
- रानी केतकी की कहानी (इन्शा अल्ला खाँ, 1803): यह कहानी से अधिक ‘किस्सागोई’ की शैली में है, लेकिन इसमें कथा के बीज मिलते हैं।
- राजा भोज का सपना (शिवप्रसाद ‘सितारे हिंद’): इसमें प्रतीकात्मकता और उपदेश की प्रधानता थी।
- इन्दुमती (किशोरीलाल गोस्वामी, 1900): आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे हिंदी की पहली मौलिक कहानी माना, हालांकि बाद में इसे शेक्सपियर के ‘टेम्पेस्ट’ का अनुवाद या छाया माना गया।
- एक टोकरी भर मिट्टी (माधवराव सप्रे, 1901): आधुनिक शोध के अनुसार इसे पहली मौलिक कहानी का दर्जा दिया जाता है क्योंकि इसमें पहली बार ‘यथार्थवादी’ संवेदना और ‘वर्ग संघर्ष’ की झलक मिलती है।
- दुलाई वाली (बंग महिला, 1907): यह कहानी मध्यमवर्गीय जीवन के हास्य और कौतूहल को बखूबी दर्शाती है।
3. प्रेमचंद पूर्व कहानी की प्रमुख विशेषताएँ
प्रेमचंद के आगमन से पहले की कहानियों को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है:
(क) विषय-वस्तु की विविधता
कहानियों के विषय ऐतिहासिक, पौराणिक, रूमानी और सामाजिक थे। लेखकों ने पुराने ऐतिहासिक प्रसंगों को उठाकर उनमें राष्ट्रीय भावना भरने की कोशिश की।
(ख) उपदेशात्मकता (Didacticism)
उस समय के रचनाकार स्वयं को समाज सुधारक मानते थे। इसलिए कहानियों का अंत अक्सर ‘बुराई पर अच्छाई की जीत’ के साथ होता था। आदर्शवाद इतना हावी था कि पात्र अक्सर हाड़-मांस के इंसान न लगकर ‘विचारों के पुतले’ लगते थे।
(ग) अनुवाद की प्रधानता
इस दौर में मौलिक कहानियों से ज्यादा जोर अनुवाद पर था। बांग्ला की उत्कृष्ट कहानियों और अंग्रेजी के जासूसी उपन्यासों के संक्षिप्त अनुवाद हिंदी कहानी की कमी को पूरा कर रहे थे। ‘सरस्वती’ पत्रिका ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया।
(घ) शिल्प और भाषा
शिल्प के स्तर पर कहानियाँ अभी भी ‘दास्तान’ या ‘किस्से’ के प्रभाव में थीं। भाषा में व्याकरणिक शुद्धता का अभाव था (जब तक महावीर प्रसाद द्विवेदी ने कमान नहीं संभाली)। वर्णनात्मकता अधिक थी और संवादों का विकास कम हुआ था।
4. प्रमुख कहानीकार और उनका योगदान
- किशोरीलाल गोस्वामी: इन्होंने लगभग 65 कहानियाँ लिखीं। इनकी कहानियों में प्रेम और रोमांस का पुट अधिक था, लेकिन शिल्प में नयापन था।
- चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’: प्रेमचंद पूर्व युग के सबसे चमकते सितारे ‘गुलेरी जी’ हैं। उनकी कहानी ‘उसने कहा था’ (1915) हिंदी कहानी के इतिहास में एक मील का पत्थर है।
- इसमें ‘फ्लैशबैक’ (पूर्वदीप्ति) पद्धति का पहली बार सफल प्रयोग हुआ।
- प्रेम, त्याग और कर्तव्य का ऐसा संतुलन इससे पहले कभी नहीं देखा गया था।
- विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’: इनकी कहानियाँ घरेलू जीवन और सामाजिक कुरीतियों पर आधारित थीं। ‘रक्षाबंधन’ इनकी एक प्रसिद्ध कहानी है।
5. मूल्यांकन: प्रेमचंद पूर्व कहानी कहाँ खड़ी थी?
यदि हम निष्पक्ष होकर देखें, तो प्रेमचंद पूर्व की कहानियाँ ‘विकास की प्रयोगशाला’ थीं।
| पक्ष | स्थिति |
|---|---|
| पात्र चित्रण | पात्र बहुत गहरे नहीं थे; वे या तो बहुत अच्छे (देवता) थे या बहुत बुरे (दानव)। |
| वातावरण | परिवेश चित्रण में स्वाभाविकता की कमी थी। |
| उद्देश्य | केवल मनोरंजन या नैतिक शिक्षा देना। |
| यथार्थवाद | यथार्थ का अभाव था; संयोग और चमत्कार पर अधिक निर्भरता थी। |
प्रेमचंद पूर्व कहानी की स्थिति :FAQ
1. प्रेमचंद पूर्व हिंदी कहानी का समय कब से कब तक माना जाता है?
हिंदी साहित्य के इतिहास में प्रेमचंद के आगमन से पहले के काल को ‘प्रेमचंद पूर्व युग’ कहा जाता है, जिसका समय मुख्य रूप से 1900 ई. से 1915 ई. तक माना जाता है।
2. हिंदी की पहली मौलिक कहानी कौन सी मानी जाती है?
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने ‘इन्दुमती’ (1900) को पहली मौलिक कहानी माना है। हालाँकि, आधुनिक शोधों के अनुसार माधवराव सप्रे की ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ (1901) को पहली मौलिक कहानी का दर्जा दिया जाता है।
3. प्रेमचंद पूर्व युग की कहानियों का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस युग की कहानियों का प्राथमिक उद्देश्य मनोरंजन, कौतूहल जगाना और नैतिक उपदेश देना था। इनमें यथार्थवाद की तुलना में आदर्शवाद और सुधारवाद की प्रधानता थी।
4. ‘सरस्वती’ पत्रिका का हिंदी कहानी के विकास में क्या योगदान है?
‘सरस्वती’ पत्रिका (संपादक: महावीर प्रसाद द्विवेदी) ने हिंदी कहानी को एक नया धरातल दिया। इसी पत्रिका के माध्यम से ‘इन्दुमती’, ‘ग्यारह वर्ष का समय’ और ‘दुलाई वाली’ जैसी प्रारंभिक कहानियाँ पाठकों तक पहुँचीं।
5. चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ की कौन सी कहानी इस युग की सर्वश्रेष्ठ रचना मानी जाती है?
गुलेरी जी द्वारा रचित ‘उसने कहा था’ (1915) इस युग की सबसे उत्कृष्ट कहानी है। यह अपनी शिल्प-विधि (Flashback तकनीक) और संवेदना के कारण आज भी बेजोड़ मानी जाती है।
7. ‘दुलाई वाली’ कहानी की लेखिका कौन हैं?
‘दुलाई वाली’ कहानी की लेखिका ‘बंग महिला’ (राजेंद्र बाला घोष) हैं। यह कहानी 1907 में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।
8. इस काल की कहानियों की भाषा-शैली कैसी थी?
इस काल की भाषा खड़ी बोली के प्रारंभिक रूप में थी। कहानियाँ वर्णनात्मक (Descriptive) अधिक होती थीं और उनमें संवादों का विकास प्रेमचंद युग की तुलना में कम हुआ था।
9. क्या इस युग में यथार्थवादी कहानियाँ लिखी गईं?
हाँ, यथार्थवाद की शुरुआत इसी युग से हो गई थी। ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसमें गरीब और अमीर के बीच के सामाजिक यथार्थ को दर्शाया गया है।
10. प्रेमचंद पूर्व युग के किन्हीं तीन प्रमुख कहानीकारों के नाम बताइए?
1. किशोरीलाल गोस्वामी2. चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’3. विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’
प्रेमचंद पूर्व कहानी की स्थिति
